ग़ज़ल
आप-सा पोषण-भरण कैसे करूँ |
और उसका अनुसरण कैसे करूँ |
आपने दिल में बिठाया भेडिया,
भेडिया -सा आचरण कैसे करूँ |
ताक में है देशद्रोही देश का ,
शांति का मैं अपहरण कैसे करूँ |
चाहता हूँ गम की बस्ती में सदा ,
मैं ख़ुशी का संचरण कैसे करूँ |
रूप में खोया हुआ दर्पण कहे ,
लोभ का मैं संवरण कैसे करूँ |
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