वंदे मातरम्! कवि मित्रों से मेरी एक जिज्ञासा है कि आप किस श्रेणी के कवि हैं ?
वैसे कवि तो सौ प्रतिशत कवि ही होता है,जो बिल्कुल निरंकुश भी होता है,उसकी निरंकुशता को स्वीकारा भी गया है-
निरंकुशा:कवयः।
कवि को विश्व में परिवर्तन लाने वाला प्रजापति तक कहा गया है-
'कविरेव प्रजापति: ,यथेदं रोचते विश्वं तथेदं परिवर्तते !'
वैदिक काल में ऋषय: मन्त्रदृष्टार: कवय: क्रान्तदर्शिन: अर्थात् ऋषि को मन्त्रदृष्टा और कवि को क्रान्तदर्शी कहा गया है।
वैसे राजशेखर ने कवि शिक्षा के अन्तर्गत शिष्यों के आधार पर कवियों के तीन भेद बताये हैं -
सारस्वत,
आभ्यासिक, तथा
औपदेशिक।
परन्तु उन्होंने ही काव्यशास्त्र में निपुणता के आधार पर कवियों के आठ भेद बताये हैं -
रचना कवि,
शब्द कवि,
अर्थ कवि,
अलंकार कवि,
उक्ति कवि,
रस कवि,
मार्ग कवि,
तथा शास्त्रार्थ कवि।
सारस्वत कवि वे हैं जिन्हें पूर्व जन्म के संस्कारों के कारण सरस्वती का प्रसाद प्राप्त रहता है।
आभ्यासिक कवि वे हैं जो अभ्यास करते करते कवि बन जाते हैं।
औपदेशिक कवि वे हैं जो किसी प्रभाव (मंत्र-तन्त्र आदि) से कवि बन जाते हैं।
पदों के संयोजन में जो निपुण होते हैं वे रचना कवि कहे जाते हैं।
शब्दों के संयोजन में जो निपुण होते हैं वे शब्द कवि कहे जाते हैं।
अर्थ सौन्दर्य में जो निपुण होते हैं वे अर्थ कवि कहे जाते हैं।
अलंकारों को प्रयोग में जो निपुण होते हैं वे अलंकार कवि कहे जाते हैं।
जो चमत्कारिक ढंग से उक्तियों को काव्य में परिणत करने में कुशल होते हैं वे उक्ति कवि कहे जाते हैं।
जो रस निर्वाह में निपुण होते हैं वे रस कवि कहे जाते हैं।
जो रीतियों के प्रयोग में निपुण होते हैं वे मार्ग कवि कहे जाते हैं।
जो शास्त्रों के अर्थों को अपनी कविता में शामिल करते हैं वे शास्त्रार्थ कवि कहे जाते हैं।
जो इन सभी गुणों से परिपूर्ण हैं तथा जो अपने काव्य में इन सभी गुणों का कुशलता से समावेश करते हैं वे महाकवि कहे जाते हैं।
केशवदास ने गुणवत्ता के आधार पर कवियों के तीन भेद बताये हैं - उत्तम, मध्यम तथा अधम।
उन कवियों को उत्तम कहा जाता है जो हरि रस में लीन रहते हैं।
मध्यम स्तर के कवि वे हैं जो मनुष्य के संदर्भ में उनके कल्याण को ही ध्यान में रखते हुए काव्य रचना करते हैं।
अधम कवि वे हैं जो गुणों को त्यागकर दोषों या अवगुणों को ही महिमामंडित करते हुए काव्य रचना करते हैं।
लेकिन आज अधम कवि प्रथम श्रेणी में,मध्यम कवि आज भी दूसरे श्रेणी में तथा उत्तम कवि तीसरे श्रेणी में स्थापित हो चुके हैं।
डॉ मनोज कुमार सिंह
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