राम राम!एगो दोहा हाजिर बा।
देखि ताल में हंस के,खिलल कंज के फूल। कउवन खातिर हो गइल,मौसम अब प्रतिकूल।।
डॉ मनोज कुमार सिंह
(शब्दार्थ-कंज-कमल, कउवन-कौओं)
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