Saturday, September 16, 2017

आलेख

वन्दे मातरम्!मित्रो!मेरे इस पोस्ट पर आपकी अमूल्य टिप्पणी सादर अपेक्षित है।

"जब जब होहि धरम की हानी"
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धर्म को बाबा मार्क्स ने कभी अफीम
कहा था।कबीर ने भी ईश्वर भक्ति को
सबसे बड़ा अमल (नशा) कहा है।सच है
धर्म और ईश्वर भक्ति सर्वश्रेष्ठ अफ़ीम और अमल ही हैं,जिसके आगे दुनिया का कोई भी
नशा असर नहीं करता,मीरा ने इसे
अपने जीवन में सिद्ध भी किया 'विष का प्याला राणा भेज्या पीवत मीरा हाँसी।' लेकिन कुछ नटवरलाल टाईप ठग लोग
दुनिया में चिलम, गाँजा, चरस,सुल्फा,मारिजुआना,एलएसडी, भांग,शराब,अफीम,मैथुन,मूल्यहीनता, झूठ मक्कारी,फरेब,अनैतिकता का
सहारा लेकर धर्म की दुनिया मे प्रवेश कर जाते हैं
और संत का मुखौटा लगाकर भोली भाली
जनता को ठगने लगते हैं।
फिर कहा गया है न कि अति सर्वत्र वर्जयेत।
जब ऐसे व्यक्ति का भांडा फूटता है तो
यहीं दुनिया उससे प्रेम की जगह
घृणा करने लगती है।धर्म,संस्कृति और अध्यात्म
भारत की असली पूँजी हैं।
इसी से यह देश विश्व में जाना भी जाता रहा है।
अगर कोई हमारे ऋषियों, महर्षियों,संतों के
धर्म रूपी हेरिटेज को
नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा
तो वह बच नहीं पायेगा।
इस विश्वास को न्यायालय भी आज
मजबूत कर रहे हैं।
इस पोस्ट के बहाने भारत के उच्चतम न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश श्री दीपक मिश्र जी को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाइयाँ।
हमें विश्वास है कि आप धर्म को
न्याय दे सकेंगे और करोड़ों जन हृदय को
नैतिक होने की प्रेरणा।

डॉ मनोज कुमार सिंह

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